चंडीगढ़: यह है ‘सिटी ब्यूटीफुल’ कहे जाने वाले चंडीगढ़ की वास्तविक और जमीनी तस्वीर। आज जब हमारे पत्रकार ने सेक्टर 37C की मार्केट का धरातल पर दौरा किया, तो पाया कि पूरी मार्केट में चारों तरफ गंदगी के बड़े-बड़े ढेर लगे हुए हैं। यह शर्मनाक तस्वीर प्रशासन और व्यवस्था को लेकर काफी कुछ बयां करती है। एक तरफ जहां नगर निगम चंडीगढ़ स्वच्छता को लेकर बड़े-बड़े दावे करता नहीं थकता, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर गंदगी का यह भयावह आलम देखने को मिल रहा है। प्रशासन और निगम के ये तमाम दावे जमीनी हकीकत से कोसों दूर सिर्फ कागजों में ही सिमटकर रह गए हैं।
पार्षदों के स्टडी टूर पर ब्रेक और जमीनी लापरवाही
पहले हर साल हमारे शहर के पार्षद स्वच्छता और विकास का मॉडल देखने तथा स्टडी टूर के लिए अलग-अलग शहरों का दौरा करते थे, लेकिन अब प्रशासन ने उन दौरों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। इन दौरों के बंद होने के बाद से धरातल पर पार्षदों की उदासीनता साफ नजर आने लगी है। मार्केट की इस बदहाली ने निगम की कार्यप्रणाली को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है, जिससे चंडीगढ़ की खूबसूरती पर एक बड़ा दाग लग रहा है।
डस्टबिन के बाहर कचरा और चालान की सख्त मांग
इस गंभीर संदर्भ में जब स्थानीय दुकानदारों से बातचीत की गई, तो उन्होंने जमीनी हकीकत का खुलासा करते हुए बताया कि मार्केट में डस्टबिन तो बकायदा लगाए गए हैं, लेकिन लोग कूड़ा-कर्कट डस्टबिन के अंदर डालने की बजाय जानबूझकर बाहर फेंक देते हैं। लोगों की इसी लापरवाही के कारण पूरी मार्केट में हर तरफ गंदगी फैलती है। परेशान दुकानदारों ने प्रशासन से गुहार लगाते हुए स्पष्ट कहा है कि जो लोग बाहर खुले में गंदगी फेंकते हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उनके चालान काटे जाने चाहिए।
पार्षद को नसीहत और जनता की असुविधा से निजात की उम्मीद
स्थानीय दुकानदारों और जनता ने अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि क्षेत्र के मौजूदा पार्षद को भी अब अपने घर से बाहर निकलकर अपनी वास्तविक जिम्मेदारी को देखना चाहिए। मार्केट के भीतर बुनियादी सफाई व्यवस्था ठप होने के कारण इस अवसर पर आम जनमानस को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। लोगों की मांग है कि स्थानीय पार्षद तुरंत इस जमीनी संकट का संज्ञान लें और आम जनता को इस नरक भरी असुविधा से जल्द से जल्द निजात दिलाएं।
संपादकीय टिप्पणी: ‘सिटी ब्यूटीफुल’ के नाम से विख्यात चंडीगढ़ के सेक्टर 37C जैसी प्रमुख मार्केट में गंदगी के ढेरों का होना नगर निगम के प्रशासनिक खोखलेपन को उजागर करता है। हर वर्ष दौरों के नाम पर चर्चा में रहने वाले पार्षदों की कार्यप्रणाली पर जनता का यह सवाल उठाना बिल्कुल जायज है कि वे अब अपने घरों से बाहर निकलकर अपनी जिम्मेदारी समझें। स्वच्छता केवल सरकारी विज्ञापनों और कागजी दावों से नहीं, बल्कि कड़े नियमों को धरातल पर लागू करने से आती है। प्रशासन को चाहिए कि वह डस्टबिन के बाहर कचरा फेंकने वालों के चालान काटने की व्यवस्था को तुरंत अमलीजामा पहनाए और पार्षद अपनी जवाबदेही तय करें, ताकि जनता को इस बड़ी असुविधा से मुक्ति मिल सके और चंडीगढ़ का गौरव बहाल रहे।
