चंडीगढ़: बढ़ते तापमान के इस दौर में जहां हर आम और खास इंसान का घर से बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो चुका है, वहीं मजबूरन अपने परिवार के किसी न किसी सदस्य की बीमारी के इलाज के लिए लोगों को अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। अस्पताल आने वाले इन तीमारदारों को इस झुलसा देने वाली गर्मी का कितना सामना करना पड़ता है, यह सोचकर ही किसी का भी दिल कांप जाता है। इस बेबस कर देने वाली गर्मी पर इंसानों का कोई जोर नहीं चलता, लेकिन ऐसी कठिन परिस्थिति में भी इंसानियत की एक बेहद खूबसूरत और राहत भरी तस्वीर सामने आई है।
सेवा की राह पर उठे कदम
अस्पताल की ओपीडी और वार्डों में उमड़ने वाली भीड़ के दर्द को समझते हुए आज गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (जीएमसीएच) सेक्टर 32, चंडीगढ़ के स्टाफ ने एक सराहनीय कदम उठाया। स्टाफ के सदस्यों ने मिलकर अस्पताल परिसर में मीठे जल की छबील लगाई। इस छबील के माध्यम से चिलचिलाती धूप में झुलस रहे लोगों को राहत देने की कोशिश की गई। इसके साथ-साथ अस्पताल स्टाफ द्वारा विशेष रूप से लंगर का भी भव्य आयोजन किया गया, ताकि दूर-दराज से आए जरूरतमंदों को भोजन मिल सके।
तपती धूप में राहत की फुहार
जैसे ही छबील और लंगर की शुरुआत हुई, वहां से आने-जाने वाले राहगीरों और जरूरतमंद लोगों का एक बड़ा तांता लग गया। अस्पताल में अपने मरीजों के इलाज के लिए आए हुए परिवार वालों ने, जो सुबह से भूखे-प्यासे परेशान हो रहे थे, इस सेवा का लाभ उठाया। तीमारदारों और आम जनता ने ठंडी छबील पीकर इस जानलेवा गर्मी से कुछ पल की राहत महसूस की और लंगर का प्रसाद खाया। राहत मिलने पर सभी सेवाार्थियों ने इस नेक कार्य के लिए अस्पताल स्टाफ और परमात्मा का दिल से धन्यवाद किया।
इंसानियत और सेवा का संगम
इस पूरे आयोजन ने यह साबित कर दिया कि अस्पताल सिर्फ बीमारियों का इलाज करने की जगह नहीं है, बल्कि संकट की घड़ी में सेवा भाव की जीती-जागती मिसाल भी बन सकता है। स्टाफ द्वारा आपसी सहयोग से की गई इस सेवा ने अस्पताल आने वाले सैकड़ों परेशान परिवारों के चेहरों पर सुकून की मुस्कान ला दी। भीषण गर्मी के इस दौर में इस तरह के निस्वार्थ प्रयास समाज के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनकर सामने आते हैं।
संपादकीय टिप्पणी: भीषण गर्मी के इस दौर में जब अस्पताल आने वाले मरीज और उनके परिजन शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद परेशान होते हैं, तब जीएमसीएच सेक्टर 32 के स्टाफ द्वारा की गई यह पहल अत्यंत सराहनीय और अनुकरणीय है। एक स्वास्थ्य संस्थान के कर्मचारियों का अपने नियमित दायित्वों से आगे बढ़कर इस तरह मानवीय संवेदना प्रकट करना समाज में एक सकारात्मक संदेश देता है। ऐसे समय में जब बढ़ती तपिश के कारण आम जनजीवन बेहाल है, मीठे पानी और भोजन की यह सेवा केवल प्यास और भूख नहीं बुझाती, बल्कि संकट से घिरे तीमारदारों को एक मानसिक संबल और ढांढस भी बंधाती है। स्वास्थ्य कर्मियों का यह सेवा भाव प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर एक बेहतरीन मिसाल है।
