चंडीगढ़: आजकल जामुन के सीजन में शहर के विभिन्न हिस्सों में जामुन विक्रेताओं ने अपने सेटअप लगाए हुए हैं। अगर बात करें सेक्टर 18 चौक से लेकर सेक्टर 17 चौक तक की, तो इस मुख्य मार्ग पर करीब 17 लोग अपने ठिकाने जमाए बैठे हैं। यहाँ से आने-जाने वाले लोग अपनी गाड़ियाँ बीच सड़क पर ही खड़ी करके जामुन की खरीददारी करने लगते हैं, जिससे यहाँ से गुजरने वाले अन्य लोग किसी भी वक्त किसी बड़े हादसे का शिकार हो सकते हैं। इस गंभीर स्थिति को देखकर यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या किसी सरकारी अधिकारी का ध्यान इस ओर नहीं गया है, या फिर जिम्मेदार अधिकारियों ने जानबूझकर अपनी आँखें बंद कर रखी हैं।
सड़कों पर सजे बाज़ार और अनदेखी का आलम
इन जामुन विक्रेताओं के कारण शाम के वक्त स्थिति और भी ज्यादा चिंताजनक हो जाती है। शाम ढलते ही यहाँ करीब 50 लोग इकट्ठे हो जाते हैं और वहीं सड़क किनारे ही अपना खाना बनाना शुरू कर देते हैं। इस जमावड़े और अव्यवस्था के चलते स्थानीय सेक्टर वासी बेहद परेशान हैं। सेक्टर निवासी इस समस्या को लेकर पुलिस में शिकायत भी दर्ज करवाते हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर ये लोग पुलिस को देखकर कुछ देर के लिए इधर-उधर हो जाते हैं और पुलिस के जाते ही दोबारा वहीं आकर जम जाते हैं।
सुबह का सन्नाटा और सुरक्षा पर गहराते सवाल
यह पूरा मामला सिर्फ यातायात व्यवस्था तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। ये लोग सुबह पांच बजे ही शहर की अलग-अलग गलियों और पार्कों में जामुन लेकर पहुँच जाते हैं। स्थानीय लोगों को अंदेशा है कि ये संदिग्ध लोग सुबह के सन्नाटे में घरों की रेकी करते हो सकते हैं और आने वाले समय में किसी बड़ी आपराधिक घटना को अंजाम दे सकते हैं। इस संभावित खतरे को देखते हुए पुलिस विभाग और नगर निगम को इन पर तुरंत और सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
संपादकीय टिप्पणी: चंडीगढ़ की सड़कों पर बिना किसी नियम और परमिशन के चल रहा यह जामुन कारोबार सिर्फ प्रशासनिक ढिलाई का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर आम नागरिकों की सुरक्षा और जान-माल के साथ खिलवाड़ है। जब रक्षक ही आँखें मूंद लें, तो अव्यवस्था का हावी होना निश्चित है। समय रहते पुलिस और नगर निगम को इस ओर कड़े कदम उठाने होंगे, इससे पहले कि कोई बेकसूर इस लापरवाही की कीमत अपनी जान देकर चुकाए।
