चंडीगढ़: चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी ने जमीन पर बैठकर तंदूर चलाने वालों को चाय का न्यौता देकर इंसानियत की एक नई मिसाल कायम की है। मेयर सौरभ जोशी के इस निमंत्रण को पाकर तंदूर वर्कर्स यूनियन के सदस्यों के चेहरों पर एक अनोखी मुस्कान आ गई। मेयर ने शहर के सभी 18 तंदूर चलाने वालों को सम्मान सहित नगर निगम में आने का निमंत्रण दिया था और साथ में अपने सभी जरूरी दस्तावेज लाने को कहा था। यह वे तंदूर वाले हैं जो उस दौर से शहर में काम कर रहे हैं जब चंडीगढ अभी नया-नया आबाद हो रहा था। मेयर ने निगम दफ्तर पहुंचे इन सभी श्रमजीवियों का दिल से सम्मान किया और उनकी समस्याओं को बेहद गंभीरता से सुना।
तीन पैसे की रोटी से शुरू हुआ ऐतिहासिक सफर
सब से बुजुर्ग महिला कमला देवी ने भावुक होकर बताया कि उनकी अब तीसरी पीढ़ी इस काम को चला रही है और साल 1959 से उनका यह तंदूर का काम लगातार चल रहा है। कमला देवी को खुद इस काम को करते हुए लगभग 45 से 50 साल का लंबा समय बीत चुका है। उन्होंने गुजरे जमाने को याद करते हुए बताया कि उस वक्त वे तंदूर पर मात्र 3 पैसे की रोटी लगाते थे। उन्होंने गर्व से साझा किया कि हमारे तंदूर का खाना खाकर कई बच्चे आगे चलकर आईपीएस (IPS), पीसीएस (PCS) और कई बच्चे डॉक्टर बने, जबकि कई बच्चे आज विदेशों में भी सैटल हो चुके हैं।
सियालकोट का पुराना नाता और बज़वाड़ा मार्केट का संघर्ष
इसी तरह सेक्टर 22 बज़वाड़ा मार्केट के साथ तंदूर चलाने वाले गुरदास मल्ल ने बताया कि वह भी पिछले 30 साल से यह काम पूरी ईमानदारी के साथ कर रहे हैं। तंदूर वर्कर्स यूनियन के प्रधान नरिंदर सिंह ने इस मौके पर बताया कि हमारी यूनियन साल 1987 से लगातार चली आ रही है और ग्राहकों को बिल्कुल साफ-सुथरा खाना खिलाना ही हमेशा से हमारी सबसे पहली प्राथमिकता रही है। उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि साल 1984 में जब पंजाब के हालात बेहद खराब थे, तो वह चंडीगढ़ आ गए थे। यहां आकर उन्होंने साल 1985 में महज एक रुपये से खाना खिलाना शुरू किया था और उस दौर में वे दस पैसे की रोटी लगाते थे। प्रधान ने यह भी बताया कि ज्यादातर तंदूर चलाने वाले मूल रूप से सियालकोट (पाकिस्तान) के रहने वाले हैं।
मेयर का आश्वासन और 85 साल की बुजुर्ग महिला को नमन
इस ऐतिहासिक मिलन के दौरान इन सभी तंदूर चालकों ने अपनी मांगों को लेकर एक मांगपत्र मेयर सौरभ जोशी को सौंपा। मेयर ने पूरे सम्मान के साथ उनका मांगपत्र लिया और विश्वास दिलाया कि आपकी हर जायज मांग को जरूर ध्यान में लाया जाएगा और वह हर सुख-दुख में आपके साथ खड़े हैं। मेयर ने वहां मौजूद सभी बुजुर्गों का विशेष आदर-सत्कार किया। उन्होंने खासकर 85 साल की बुजुर्ग महिला कमला देवी को देखते हुए आदर से कहा कि आप इस भीषण गर्मी में भी तंदूर पर रोटी लगाती हैं, आप सच में धन्य हैं। इसके बाद मेयर सौरभ जोशी ने हाथ जोड़कर वहां मौजूद सभी तंदूर चालकों का तह-दिल से धन्यवाद किया।
संपादकीय टिप्पणी: चंडीगढ़ नगर निगम की चौखट पर मेयर सौरभ जोशी द्वारा तंदूर चलाने वाले आम कामगारों को चाय पर बुलाना और उन्हें प्रशासनिक सम्मान देना राजनीति में मानवीय संवेदनाओं की एक बेहतरीन मिसाल है। चंडीगढ को बसाने और उसे अपने खून-पसीने से सींचने वाले इन तंदूर चालकों का इतिहास साल 1959 और सियालकोट के विभाजनकारी दिनों से जुड़ा हुआ है। मेयर का यह कदम केवल एक शिष्टाचार नहीं है, बल्कि उन मेहनतकश हाथों की पहचान का सम्मान है जिन्होंने शहर के अफसरों, डॉक्टरों और प्रवासियों का पेट पाला है। प्रशासन को अब केवल आश्वासन तक सीमित न रहकर, इनके द्वारा सौंपे गए मांगपत्र पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए और इन पारंपरिक तंदूर चालकों के दस्तावेजों को कानूनी सुरक्षा देकर इनके रोजगार को स्थायी रूप से सुरक्षित करना चाहिए, ताकि चंडीगढ के इस जीवंत इतिहास की महक भविष्य में भी बरकरार रहे।
