चंडीगढ़: 18 अगस्त को शाम 4 बजे के क़रीब एकाएक काले बादलों ने पूरे शहर को अपनी आगोश में ले लिया। ठंडी हवाओं के चलने के साथ ही बारिश ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया। महज 2 घंटे तक जमकर हुई बारिश ने आने-जाने वाले लोगों और दफ़्तरों से लौट रहे सरकारी कर्मचारियों का रास्ता पूरी तरह रोक दिया, जिससे लोग 2 से 3 घंटे तक भीषण जाम में फंसे रहे और शहर की सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह धरी की धरी रह गईं।
काले बादलों का पहरा और बेबस हुई व्यवस्था
शाम के समय अचानक मौसम बदला और काले बादलों के छाते ही तेज़ बौछारों ने शहर को घेर लिया। 2 घंटे की इस तूफ़ानी बारिश से जिधर देखो उधर गाड़ियों की लंबी कतारें और जाम में फंसे लाचार लोग ही नज़र आ रहे थे। इस बदहाल स्थिति के बीच लोग नगर निगम की कार्य प्रणाली और प्रशासनिक दावों को कोसते हुए देखे गए।



जलमग्न सड़कें और खराब होती गाड़ियाँ
बारिश का प्रकोप इतना भयंकर था कि सभी मुख्य सड़कों पर 2 से 3 फुट तक पानी भर गया। पानी का स्तर बढ़ते ही सड़कों पर चलती गाड़ियाँ और बाइकें बंद होने लगीं। कई लोग पानी के बीच बेबस होकर अपनी बंद गाड़ियों को टो करके ले जाते हुए दिखाई दिए। प्रशासन ने बरसात से पहले ही एडवाइजरी ज़ारी की थी और आपातकालीन फोन नंबर भी ज़ारी किए थे, लेकिन सीज़न की इस सबसे तेज़ वर्षा के आगे सारे इंतजाम नाकाफी साबित हुए।
मोबाइल पर अलर्ट सायरन और मौसम की उम्मीद
स्थिति बिगड़ते ही सरकार की ओर से हर एक के मोबाइल पर अलर्ट सायरन बजने शुरू हो गए, जिसमें चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली में भारी वर्षा की चेतावनी ज़ारी की गई। हालांकि इस भयंकर बारिश की वजह से लोगों को लंबे समय से पड़ रही उमस और भयंकर गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद भी जगी है। मौसम विभाग की ओर से बुधवार को हल्के बादल छाए रहने की संभावना जताई गई है।
संपादकीय टिप्पणी: चंडीगढ़ में 18 अगस्त की शाम हुई सीज़न की सबसे तेज़ बारिश ने एक बार फिर प्रशासनिक तैयारियों और नगर निगम की ड्रेनेज व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। प्री-मानसून एडवाइजरी और हेल्पलाइन नंबर जारी करना कागज़ी तौर पर भले ही सही कदम लगे, लेकिन ज़मीनी हक़ीकत यह है कि 2 घंटे की बारिश में ही सड़कें जलमग्न हो गईं और नागरिक घंटों जाम तथा अपनी खराब गाड़ियों के साथ सड़कों पर जूझते रहे। स्मार्ट सिटी के रूप में पहचाने जाने वाले शहर में बारिश का पानी सड़कों को थाम दे, यह नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आपदा प्रबंधन केवल अलर्ट सायरन बजाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि बुनियादी ढांचे को इस तरह मज़बूत करने की ज़रूरत है ताकि आम जनता को ऐसी दुर्दशा का सामना न करना पड़े।
