चंडीगढ़: भारतीय मजदूर संघ (BMS) चंडीगढ़ के नवनियुक्त पदाधिकारियों की पहली और बेहद महत्वपूर्ण बैठक सेक्टर 29 स्थित सेवा भारती कार्यालय में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य संगठन की नई टीम के बीच समन्वय स्थापित करना और आने वाले समय में मजदूर हितों की आवाज को बुलंद करने के लिए रणनीतिक खाका तैयार करना था। बैठक के दौरान पदाधिकारियों ने एकजुटता का परिचय देते हुए यह स्पष्ट किया कि आने वाले दिनों में भारतीय मजदूर संघ शहर के हर श्रमिक तक अपनी पहुंच बनाएगा।
संगठन विस्तार पर विशेष मंथन
बैठक में मुख्य रूप से आदरणीय श्री निरंजन जी (संगठन मंत्री, भारतीय मजदूर संघ चंडीगढ़), प्रेसिडेंट बलविंदर सिंह और जनरल सेक्रेटरी जसवंत सिंह ने शिरकत की। संगठन की मजबूती पर चर्चा करते हुए नेताओं ने जोर दिया कि जमीनी स्तर पर संगठन को और अधिक सशक्त बनाने के लिए नए सदस्यों को जोड़ने का अभियान चलाया जाएगा। एडिशनल सेक्रेटरी शिव मूर्ति सिंह ने भी संगठन के विस्तार को लेकर अपने विचार साझा किए और कार्ययोजना में अनुशासन के महत्व पर प्रकाश डाला।
नए पदाधिकारियों की सक्रिय भागीदारी
इस महत्वपूर्ण रणनीतिक सत्र में भारतीय मजदूर संघ के उपाध्यक्ष दिग्विजय नायर, मंदीप, मंत्री इकबाल सिंह और तालिफ हुसैन ने भी हिस्सा लिया। इसके अलावा ऑफिस सेक्रेटरी बलविंदर सिंह, कैशियर इंद्र जी और अन्य प्रमुख सदस्य भी मौजूद रहे। बैठक में सभी पदाधिकारियों को उनकी नई जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया गया और यह तय किया गया कि संगठन की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे।
भविष्य की कार्ययोजना और सदस्यता अभियान
बैठक के अंतिम चरण में संगठन को मजबूत करने के लिए एक ठोस रूपरेखा (ब्लूप्रिंट) तैयार की गई। पदाधिकारियों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि कार्यस्थलों पर जाकर मजदूरों की समस्याओं को सुना जाएगा और उन्हें संगठन के साथ जोड़ा जाएगा। सदस्य बनाने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने पर भी चर्चा हुई, ताकि चंडीगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिक इस मंच का हिस्सा बनकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ सकें।
संपादकीय टिप्पणी: भारतीय मजदूर संघ की यह पहली बैठक केवल औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि चंडीगढ़ के श्रमिक वर्ग के लिए एक उम्मीद की किरण है। जब किसी संगठन की नई टीम जोश और स्पष्ट विजन के साथ मैदान में उतरती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव औद्योगिक और प्रशासनिक क्षेत्रों में साफ दिखाई देता है। ‘संगठन ही शक्ति है’ के मूलमंत्र को अपनाते हुए नए सदस्यों को जोड़ने का लक्ष्य न केवल बीएमएस के आधार को बढ़ाएगा, बल्कि सामूहिक सौदेबाजी की ताकत को भी मजबूत करेगा। भविष्य में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह नई टीम श्रमिकों की जटिल समस्याओं का समाधान करने में कितनी प्रभावी सिद्ध होती है।
