चण्डीगढ़: प्रकृति के अत्यधिक दोहन, लगातार हो रही वनों की कटाई, बढ़ते प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में धरती को बचाने की पुकार अब और तेज़ हो गई है। हर साल 5 जून को मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस महज़ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि इंसानी वजूद को सुरक्षित रखने और एक स्वस्थ व टिकाऊ भविष्य की दिशा में सकारात्मक कदम उठाने का वैश्विक अनुष्ठान है। इसी पावन उद्देश्य को चरितार्थ करते हुए भारतीय सांस्कृतिक ज्ञान संगठन ने इस बार का पर्यावरण दिवस चण्डीगढ़ पुलिस सेक्टर 34D के साथ मिलकर बेहद उत्साह और ज़िम्मेदारी के साथ मनाया, जहाँ खाकी और समाजसेवियों ने मिलकर प्रकृति की रक्षा का एक नया अध्याय लिखा।
हरियाली की ओर बढ़ते खाकी के कदम: चण्डीगढ़ पुलिस की सक्रिय सहभागिता
इस विशेष अभियान के तहत चण्डीगढ़ पुलिस से एसडीपीओ साउथ (SDPO South) की टीम ने कार्यक्रम में अग्रसर होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। रोपण अभियान के दौरान प्रकृति को हरा-भरा बनाने के संकल्प के साथ गुरमीत सिंह (एएसआई रीडर एसडीपीओ साउथ), पुष्पिंदर सिंह (एमएससी), समावेश टीम, हेड कांस्टेबल सुमन, हेड कांस्टेबल महेश, हेड कांस्टेबल बलविंदर, कांस्टेबल दिनेश, कांस्टेबल अभिषेक, कांस्टेबल नेहा, कांस्टेबल निक्की, कांस्टेबल साक्षी, कांस्टेबल पिंकी और कांस्टेबल कृष्ण मुख्य रूप से उपस्थित रहे। पुलिसकर्मियों ने अपने हाथों से मिट्टी खोदकर पौधों को रोपा और पर्यावरण को स्वच्छ रखने की शपथ ली।
प्लास्टिक मुक्त भारत का बड़ा संदेश: समाज सुधारक की प्रेरक पुकार
भारतीय सांस्कृतिक ज्ञान संगठन के संस्थापक एवं प्रसिद्ध समाजसेवी श्री अनूप सरीन जी ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी व्यक्तियों को संबोधित किया। उन्होंने मानव जाति के उज्जवल भविष्य हेतु हर नागरिक को पर्यावरण सम्बन्धी गतिविधियों में बढ़-चढ़कर आगे आने के लिए गहराई से प्रेरित किया। धरती को बंजर होने से बचाने के लिए उन्होंने एक बेहद महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि हमें प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह बंद करना होगा। उन्होंने प्लास्टिक के स्थान पर दैनिक जीवन में केवल कागज़, कपड़े और जूट के थैलों का प्रयोग करने पर विशेष बल दिया, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक शुद्ध वातावरण सौंपा जा सके।
एकजुट हुआ समाज और संस्था का कारवां: सामाजिक दिग्गजों की अनुकरणीय मौजूदगी
प्रकृति को सहेजने के इस महायज्ञ में संगठन के कई प्रबुद्ध और प्रबुद्ध नागरिक भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नज़र आए। भारतीय सांस्कृतिक ज्ञान संगठन चण्डीगढ़ की ओर से शास्त्री जगदीश, सुशील भाटिया, अशोक शर्मा, पायलट सिंह, विशव गुप्ता, नरेश गोयल और हरीश चंदर शर्मा आदि ने कार्यक्रम में विशेष रूप से शिरकत की। इन सभी गणमान्य व्यक्तियों ने मिलकर न केवल पौधारोपण किया बल्कि समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति अलख जगाने का दृढ़ निश्चय भी दोहराया।
संपादकीय टिप्पणी: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर चंडीगढ़ पुलिस और भारतीय सांस्कृतिक ज्ञान संगठन का यह संयुक्त प्रयास समाज के लिए एक बेहतरीन मिसाल है। ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण के इस दौर में केवल सरकारी नीतियां पर्यावरण को नहीं बचा सकतीं, जब तक कि सुरक्षा बल और सामाजिक संस्थाएं मिलकर धरातल पर ऐसे कार्य न करें। समाजसेवी अनूप सरीन जी द्वारा प्लास्टिक को त्यागकर कागज़ और जूट के थैलों को अपनाने का आह्वान सीधे तौर पर हमारी जीवनशैली में बदलाव की मांग करता है। कानून व्यवस्था संभालने वाली पुलिस जब प्रकृति व्यवस्था को सुधारने के लिए हाथ में पौधे थामती है, तो इससे आम जनता में एक गहरा और सकारात्मक संदेश जाता है। आवश्यकता इस बात की है कि ऐसे अभियानों को केवल एक दिन के उत्सव तक सीमित न रखकर रोपे गए पौधों की निरंतर देखभाल की जाए, तभी ‘हरियाली से खुशहाली’ का यह नारा वास्तव में धरातल पर सच साबित हो सकेगा।
