चंडीगढ़: चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा डीबीटी राशन कार्ड धारकों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली यानी राशन व्यवस्था में प्रस्तावित बदलाव को लेकर लोगों में चिंता और असंतोष का माहौल देखा जा रहा है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पात्र राशन कार्ड धारकों को राशन सामग्री उपलब्ध कराने के बजाय उसके बराबर राशि डिजिटल करेंसी के रूप में पीएनबी डिजिटल रुपी (PNB Digital Rupee) ऐप के माध्यम से उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है, जिसका उपयोग केवल प्रशासन द्वारा चिन्हित दुकानों पर ही किया जा सकेगा। इस संवेदनशील विषय पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चंडीगढ़ के पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर श्री जसवीर सिंह बंटी ने जनता के हक में अपनी आवाज़ बुलंद कर दी है।
डिजिटल साक्षरता की कमी और गरीबों पर तकनीकी मार
यह व्यवस्था आम लोगों, विशेषकर गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों के लिए अनेक व्यावहारिक कठिनाइयाँ उत्पन्न कर सकती है। इस चिंता को उजागर करते हुए श्री जसवीर सिंह बंटी ने कहा कि कई लाभार्थी तकनीकी संसाधनों और डिजिटल भुगतान प्रणालियों के उपयोग से पूरी तरह परिचित नहीं हैं, जिसके कारण उन्हें आवश्यक खाद्य सामग्री प्राप्त करने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल रुपी ऐप को समझने और उसे सही ढंग से संचालित करने में असमर्थ वर्ग इस नई प्रणाली के कारण अपने बुनियादी अधिकारों से वंचित हो सकता है।
सीमित दुकानों की पाबंदी और खाद्य सुरक्षा पर संकट
वर्तमान राशन वितरण प्रणाली सीधे तौर पर लाभार्थियों को खाद्यान्न उपलब्ध कराती है, जिससे उनके परिवारों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होती है। इस व्यवस्था के महत्व को समझाते हुए उन्होंने आगे कहा कि यदि इसके स्थान पर सीमित दुकानों पर उपयोग की जाने वाली डिजिटल करेंसी व्यवस्था लागू की जाती है, तो इससे लोगों की सुविधा, विकल्पों और पहुंच पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। आम जनता को अपनी पसंद और नज़दीकी राशन डिपो से खाद्यान्न लेने की आज़ादी होनी चाहिए, न कि उन्हें किसी विशेष तकनीक या चुनिंदा दुकानों के दायरे में बांधा जाना चाहिए।
राज्यपाल से पुनर्विचार की गुहार और जनहित को सर्वोपरि रखने की मांग
श्री बंटी ने चंडीगढ़ के प्रशासक एवं पंजाब के राज्यपाल महोदय से विशेष अपील की है कि इस प्रस्तावित व्यवस्था पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए तथा राशन कार्ड धारकों को पूर्व की भांति सीधे राशन उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने प्रशासन से पुरज़ोर मांग की कि किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले आम जनता, सामाजिक संगठनों तथा जनप्रतिनिधियों की राय अवश्य ली जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनहित को सर्वोपरि रखते हुए ऐसी किसी भी व्यवस्था को लागू न किया जाए, जिससे गरीब और जरूरतमंद वर्ग को असुविधा हो। जनता की सुविधाओं और अधिकारों की रक्षा के लिए वे इस मुद्दे को लगातार उठाते रहेंगे और जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों के समक्ष भी इस विषय को मजबूती से रखेंगे।
संपादकीय टिप्पणी: चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा डीबीटी राशन कार्ड धारकों के लिए प्रस्तावित डिजिटल करेंसी आधारित व्यवस्था और पीएनबी डिजिटल रुपी ऐप की अनिवार्यता निस्संदेह तकनीकी विकास का एक हिस्सा हो सकती है, लेकिन इसके व्यावहारिक धरातल को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। पूर्व सीनियर डिप्टी मेयर जसवीर सिंह बंटी द्वारा उठाई गई चिंताएं उस गरीब वर्ग की वास्तविक स्थिति को बयां करती हैं, जो आज भी स्मार्टफोन और डिजिटल साक्षरता से कोसों दूर है। राशन व्यवस्था का मूल उद्देश्य हर गरीब तक भोजन की पहुंच सुनिश्चित करना है, न कि उसे तकनीकी उलझनों और चिन्हित दुकानों के चक्कर काटने पर मजबूर करना। प्रशासन को चाहिए कि वह जनहित को ध्यान में रखते हुए इस फैसले पर पुनर्विचार करे और जनप्रतिनिधियों व जनता की राय को शामिल करके ही कोई पारदर्शी कदम उठाए, ताकि विकास की दौड़ में समाज का सबसे कमज़ोर तबका पीछे न छूट जाए।
