चंडीगढ़: वर्षों से जर्जर सड़कों और बदहाली का दंश झेल रहे चंडीगढ़ के ट्रांसपोर्ट नगर के लिए आज का दिन ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बना। क्षेत्र में सड़क रीकार्पेटिंग (Road Recarpeting) के कार्य का विधिवत शुभारंभ किया गया, जिससे स्थानीय ट्रांसपोर्टरों और व्यापारियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। यह परियोजना न केवल सड़कों को गड्ढामुक्त करेगी, बल्कि पूरे ट्रांसपोर्ट हब के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
रफ्तार के साथ विकास: 7 दिन का लक्ष्य
प्रशासन ने इस कार्य को लेकर अपनी गंभीरता स्पष्ट कर दी है। ₹1.33 करोड़ की इस परियोजना को महज एक सप्ताह के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सड़कों के सुधरने से वाहनों की आवाजाही सुगम होगी, दुर्घटनाओं पर लगाम लगेगी और व्यापारिक समय की बचत होगी।
राज्यपाल का ‘ग्राउंड जीरो’ निरीक्षण और त्वरित एक्शन
इस विकास कार्य के पीछे चंडीगढ़ के प्रशासक एवं पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की सक्रियता का बड़ा हाथ है। राज्यपाल ने स्वयं कई बार ट्रांसपोर्ट नगर का दौरा कर वहां की बदहाली, जलभराव और ट्रैफिक की अव्यवस्था को देखा था। उनके सख्त निर्देशों के बाद प्रशासन के विभिन्न विभागों—नगर निगम, बिजली विभाग और बागवानी विभाग—ने मिलकर इस कार्य को अमलीजामा पहनाना शुरू किया।
टीम वर्क की जीत: एसोसिएशन और प्रशासन का तालमेल
चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के चेयरमैन के.के. अबरोल और प्रधान जसबीर सिंह गिल के नेतृत्व में एसोसिएशन ने प्रशासन के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा। उपाध्यक्ष पवन शर्मा ने कहा कि ट्रांसपोर्ट नगर को स्वच्छ और सुंदर बनाना एक पुराना सपना था, जो अब साकार हो रहा है। इस सफलता में वरिष्ठ उपाध्यक्ष तरसेम पुरी, महासचिव बलदीप सिंह (लक्की), सचिव जीत राम और कोषाध्यक्ष देशराज सिंह सहित पूरी टीम का सक्रिय योगदान रहा।
सिर्फ सड़कें ही नहीं, मानवीय सुविधाओं पर भी जोर
ट्रांसपोर्ट नगर के इस कायाकल्प में मानवीय संवेदनाओं का भी ध्यान रखा गया है। ड्राइवरों और श्रमिकों के लिए बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने की योजना है:
- विश्राम गृह: ड्राइवरों के रुकने और सोने के लिए उचित स्थान।
- स्वास्थ्य: व्यायाम के लिए जिम और पार्क की सुविधा।
- बुनियादी जरूरतें: स्वच्छ पेयजल और रियायती दरों पर भोजन के लिए कैंटीन।
बनेगा मॉडल ट्रांसपोर्ट हब
आने वाले समय में ट्रांसपोर्ट नगर को एक मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की तैयारी है। सड़क सुधार के साथ-साथ यहाँ की स्वच्छता और ट्रैफिक व्यवस्था को भी सुव्यवस्थित किया जाएगा। ट्रांसपोर्टरों का मानना है कि इस बदलाव से चंडीगढ़ के व्यापारिक परिदृश्य को नई गति मिलेगी और यह क्षेत्र अन्य शहरों के लिए एक उदाहरण बनेगा।
संपादकीय टिप्पणी:
चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट नगर की बदहाली लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती और ट्रांसपोर्टरों के लिए पीड़ा का विषय रही है। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया द्वारा सीधे हस्तक्षेप कर जमीनी स्तर पर कार्य शुरू करवाना ‘गुड गवर्नेंस’ का प्रतीक है। ₹1.33 करोड़ का निवेश और एक हफ्ते का डेडलाइन यह दर्शाता है कि इच्छाशक्ति हो तो दशकों पुरानी समस्याएं भी चुटकियों में सुलझ सकती हैं। अब जरूरत इस बात की है कि निर्माण के बाद इसके रखरखाव (Maintenance) पर भी ध्यान दिया जाए और ड्राइवरों के लिए प्रस्तावित जिम व विश्राम गृह जैसी योजनाओं को कागजों से निकालकर धरातल पर उतारा जाए।
