चंडीगढ़: सैक्टर 26 स्थित मुख्य सब्जी मंडी में आज सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई जब मार्केट कमेटी की टीम ने अवैध रूप से फड़ी लगाने वालों के खिलाफ कड़ा शिकंजा कसा। जैसे ही विभाग की टीम भारी दलबल के साथ मंडी पहुंची, अवैध कब्जा करने वाले फड़ी संचालक अपना सामान समेटकर इधर-उधर भागने लगे। कुछ लोगों ने कार्रवाई से बचने के लिए अपना सामान पक्के शेडों के पीछे छिपाने की कोशिश की, लेकिन मुस्तैद टीम ने औचक चेकिंग के दौरान सारा सामान ढूंढ निकाला।
जेसीबी मशीन से की गई कार्रवाई
मार्केट कमेटी की टीम ने नरमी बरतने की बजाय सख्ती दिखाई और शेडों में छिपाया गया सामान बाहर फेंकना शुरू कर दिया। मौके पर मौजूद जेसीबी मशीन के जरिए अवैध फड़ियों और वहां रखे सामान को नष्ट कर दिया गया। इस दौरान कुछ फड़ी वालों और विभागीय कर्मचारियों के बीच तीखी नोक-झोंक और बहस भी देखने को मिली। फड़ी वालों का आरोप था कि उन्हें संभलने का मौका नहीं दिया गया, जबकि विभाग का कहना है कि इन्हें बार-बार चेतावनी दी जाती है, पर ये बाज नहीं आते।
शाम ढलते ही फिर बिगड़ जाते हैं हालात
मार्केट कमेटी के अधिकारियों ने बताया कि इन फड़ी वालों के साथ प्रशासन का ‘आंख-मिचोली’ का खेल रोजाना चलता है। सुबह टीम को देखकर ये भाग जाते हैं, लेकिन शाम 5-6 बजे के बाद मंडी में फिर से अवैध फड़ियों का जाल बिछ जाता है। इसके कारण मंडी में आने वाले आम लोगों और खरीदारों का पैदल निकलना भी दूभर हो जाता है। अतिक्रमण के कारण घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे मंडी का अनुशासन पूरी तरह भंग हो जाता है।
राजस्व और स्वरोजगार के लिए स्थायी समाधान की जरूरत
मंडी के जानकारों और आम लोगों का मानना है कि केवल सामान नष्ट करना ही इस समस्या का समाधान नहीं है। यदि प्रशासन इन फड़ी वालों के लिए कोई निश्चित जगह निर्धारित कर दे, तो इससे दो बड़े फायदे होंगे: पहला, चंडीगढ़ प्रशासन को तहबाजारी के रूप में राजस्व (Revenue) प्राप्त होगा और दूसरा, इन गरीब लोगों को अपनी रोजी-रोटी कमाने का एक सम्मानजनक जरिया मिल जाएगा। इससे मंडी में भीड़ का प्रबंधन भी बेहतर होगा और अवैध वसूली पर भी लगाम लगेगी।
संपादकीय टिप्पणी:
सैक्टर 26 मंडी में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है, लेकिन प्रशासन को यह समझना होगा कि ये फड़ी वाले शहर की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) का हिस्सा हैं। बार-बार सामान नष्ट करने से गरीब का नुकसान होता है और समस्या जस की तस बनी रहती है। ‘स्मार्ट सिटी’ चंडीगढ़ में रेहड़ी-फड़ी वालों के लिए वेंडिंग जोन की तर्ज पर मंडी में भी एक व्यवस्थित नीति होनी चाहिए। इससे न केवल मंडी का रास्ता साफ होगा, बल्कि सरकारी खजाने में भी पैसा आएगा। डंडे के साथ-साथ प्रबंधन (Management) की भी सख्त जरूरत है।
