कसौली: हिमाचल प्रदेश के पर्यटन स्थल कसौली से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां बीती रात करीब चार बजे यहां की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक ‘हैरिटेज मार्केट’ भीषण आग की भेंट चढ़ गई। इस अग्निकांड में 11 दुकानें पूरी तरह जलकर राख के ढेर में तब्दील हो गई हैं। बताया जा रहा है कि आग लगने की मुख्य वजह बिजली का शॉर्ट सर्किट था, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और पूरी मार्केट को अपनी चपेट में ले लिया।
लाचारी की रात और प्रशासन की अनदेखी
स्थानीय लोगों के अनुसार, जैसे ही आग लगी उन्होंने तुरंत प्रशासनिक अधिकारियों को संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन आरोप है कि किसी भी अधिकारी ने फोन उठाने की जहमत नहीं उठाई। पुलिस विभाग का इस मामले में अलग ही तर्क है; उनका दावा है कि उन्हें आग की सूचना 6 बजे मिली। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब तक फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची, तब तक सब कुछ जल चुका था। दुकानों में रखे जूते-चप्पल, दवाइयां (केमिस्ट शॉप), गर्म कपड़े और रेस्टोरेंट का सारा सामान जलकर राख हो गया है।
धमाकों की गूंज और सकरी गलियों की चुनौती
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि आग इतनी भयानक थी कि दुकानों के भीतर रखे सिलेंडरों में भी धमाके होने लगे, जिससे पूरा क्षेत्र दहल गया। मार्केट की भौगोलिक स्थिति और गलियां बेहद सकरी होने के कारण फायर ब्रिगेड की गाड़ियां घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाईं। पानी की बौछारें दूर से करने की कोशिश तो की गई, लेकिन तब तक दुकानदारों की जीवन भर की जमापूंजी और उनकी रोजी-रोटी का जरिया आग की भेंट चढ़ चुका था। इस हादसे में दुकानदारों को लाखों रुपये का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है।
मंदी के दौर में रोजी-रोटी का संकट
यह अग्निकांड ऐसे समय में हुआ है जब देश पहले ही ईरान युद्ध जैसे अंतरराष्ट्रीय हालातों के कारण आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है। इन दुकानदारों के लिए यह किसी दोहरी मार से कम नहीं है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या सरकार इन प्रभावित दुकानदारों को उचित मुआवजा देकर दोबारा खड़ा होने में मदद करेगी या फिर सरकारी फाइलों और आश्वासनों के बीच इनकी रोजी-रोटी हमेशा के लिए डूब जाएगी। स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि इस ऐतिहासिक मार्केट को बचाने और पीड़ितों को तुरंत मरहम लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
संपादकीय टिप्पणी:
कसौली की हैरिटेज मार्केट में लगी यह आग केवल संपत्तियों का नुकसान नहीं है, बल्कि उस ऐतिहासिक विरासत का भी नुकसान है जो दशकों से कसौली की पहचान रही है। इस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों और सकरी गलियों में बचाव कार्यों की चुनौतियों को उजागर किया है। प्रशासन की कथित फोन न उठाने वाली लापरवाही और सूचना तंत्र की देरी बेहद चिंताजनक है। सरकार को चाहिए कि वह मंदी की मार झेल रहे इन छोटे कारोबारियों को तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान करे और भविष्य में ऐसे ऐतिहासिक स्थलों पर सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य करे, ताकि विरासत और रोजी-रोटी दोनों सुरक्षित रह सकें।
