चंडीगढ़:
एक ऐसे दौर में जहां वैश्विक स्तर पर वैचारिक दूरियां बढ़ रही हैं, वहां भारतीय जीवन मूल्यों और विश्व बंधुत्व की गूंज एक प्रतिष्ठित मंच से सुनाई दी। एम.सी.एम. डी.ए.वी. कॉलेज का प्रांगण उस समय गहरे सांस्कृतिक और साहित्यिक विमर्श का केंद्र बन गया, जब वहां एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक गरिमामयी आयोजन में पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान सांसद अनुराग ठाकुर ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, संस्कृति और भारतीय जीवन मूल्यों पर केंद्रित एक से बढ़कर एक विविध और भावपूर्ण प्रस्तुतियां दी गईं, जिन्होंने वहां उपस्थित हर एक सहृदय जनसमूह को भाव-विभोर कर दिया और पूरे माहौल को एक उत्सव में बदल दिया।
एक ऐतिहासिक कृति का जन्म
सांस्कृतिक छटा के बीच इस कार्यक्रम का सबसे स्वर्णिम क्षण वह था, जब मंच पर उपस्थित महानुभावों द्वारा जाने-माने साहित्यकार करमचंद जी की सद्यःप्रकाशित पुस्तक ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का विधिवत लोकार्पण किया गया। मुख्य अतिथि सहित मंच पर आसीन तमाम विशिष्ट अतिथियों ने इस पुस्तक को एक साधारण रचना न मानकर भारतीय संस्कृति, विश्वबंधुत्व, शाश्वत मानवीय मूल्यों और अहिंसा की विचारधारा को समर्पित एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रासंगिक कृति बताया। इस लोकार्पण ने कार्यक्रम की गरिमा को एक नए शिखर पर पहुंचा दिया।
पन्नों में सिमटा शांति और मानवता का दर्शन
इस विमोचित पुस्तक के भीतर छिपे संदेशों को रेखांकित करते हुए वक्ताओं ने इसके वैचारिक पहलुओं पर प्रकाश डाला। पुस्तक के भीतर मानवता, विश्व शांति, पारिवारिक मूल्यों के साथ-साथ “नर सेवा ही नारायण सेवा” जैसे महान और प्राचीन भारतीय आदर्शों को बेहद सरल, सुबोध और प्रभावशाली भाषा में पिरोया गया है। लेखक करमचंद जी ने महात्मा बुद्ध, महात्मा गांधी तथा भारत के महान ऋषि-मुनियों के कालजयी विचारों का आश्रय लेकर आज के अशांत विश्व में आपसी प्रेम, संवाद और सहअस्तित्व का एक अत्यंत जरूरी संदेश देने का सफल प्रयास किया है।
मुख्य अतिथि का उद्बोधन और भावी राह
मंच से उपस्थित जनसमूह और प्रबुद्ध वर्ग को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि सांसद अनुराग ठाकुर ने विचारों की एक नई लौ जलाई। उन्होंने अपने सारगर्भित संबोधन में पुरजोर शब्दों में कहा कि हमारी महान भारतीय संस्कृति अनादि काल से सदैव “वसुधैव कुटुम्बकम्” की पावन और उदार भावना को अपने हृदय में संजोकर आगे बढ़ी है। उन्होंने बदलते सामाजिक परिदृश्य का हवाला देते हुए कहा कि आज के आधुनिक और चुनौतीपूर्ण समय में ऐसे उच्च कोटि के साहित्य की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ गई है, जो भटके हुए समाज को एक सही और सकारात्मक दिशा प्रदान करने का सामर्थ्य रखता हो।
आभार के साथ एक नई शुरुआत
इस महत्वपूर्ण और भव्य वैचारिक महाकुंभ में विभिन्न गणमान्य अतिथियों, प्रबुद्ध शिक्षाविदों, जाने-माने साहित्यकारों, जिज्ञासु विद्यार्थियों एवं सांस्कृतिक जगत से गहराई से जुड़े लोगों की उल्लेखनीय और भारी उपस्थिति दर्ज की गई। पूरे कार्यक्रम के दौरान वैचारिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का दौर चलता रहा। आयोजन के अंतिम चरण में, इस सफल और प्रेरणादायी समागम के समापन पर आयोजकों द्वारा मुख्य अतिथि सहित वहां पधारे सभी अतिथियों, विद्वानों और सहयोगियों का सहृदय आभार व्यक्त किया गया।
संपादकीय टिप्पणी: एम.सी.एम. डी.ए.वी. कॉलेज में आयोजित यह भव्य कार्यक्रम केवल एक सांस्कृतिक आयोजन या पुस्तक का विमोचन मात्र नहीं है, बल्कि यह वर्तमान समय में भारतीय जीवन दर्शन को पुनर्जीवित करने का एक गंभीर अकादमिक प्रयास है। पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की उपस्थिति और साहित्यकार करमचंद की पुस्तक ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का लोकार्पण इस बात को पुख्ता करता है कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नई पीढ़ी को बुद्ध, गांधी और ऋषि-मुनियों के सहअस्तित्व और अहिंसा के विचारों से जोड़ना कितना अपरिहार्य हो चुका है। यह आयोजन समाज को यह गहरा संदेश देने में सफल रहा है कि वैश्विक समस्याओं का समाधान केवल तकनीकी प्रगति में नहीं, बल्कि “नर सेवा ही नारायण सेवा” जैसे हमारे मूल भारतीय आदर्शों और सांस्कृतिक चेतना में निहित है।
