चंडीगढ़: एक तरफ जहां पूरा शहर नए साल 2026 के स्वागत की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था में डूबा हुआ है, वहीं शातिर चोरों ने चंडीगढ़ पुलिस की मुस्तैदी को खुली चुनौती दी है। सेक्टर-18B में पंचायत भवन के ठीक पीछे से एक ई-रिक्शा चोरी होने का मामला सामने आया है। हैरान करने वाली बात यह है कि सेक्टर-19 थाना क्षेत्र के तहत पिछले तीन दिनों के भीतर वाहन चोरी की यह दूसरी बड़ी घटना है।
मात्र 30 मिनट में वारदात को दिया अंजाम
पीड़ित ई-रिक्शा चालक सरोज ने बताया कि वह शाम करीब 5:00 बजे सेक्टर-18B के मकान नंबर 543 के बाहर अपना ई-रिक्शा (नंबर: CH01TE2295) खड़ा करके पास ही अपने एक रिश्तेदार से मिलने गया था। जब वह मात्र आधे घंटे बाद यानी 5:30 बजे वापस लौटा, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। वहां से उसका ई-रिक्शा गायब था। काफी खोजबीन करने के बाद भी जब वाहन का सुराग नहीं लगा, तो पीड़ित मदद के लिए पुलिस के पास पहुँचा।
पुलिस का टालमटोल भरा रवैया: “सुबह आना”
इस घटना ने चंडीगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित का आरोप है कि जब वह शिकायत दर्ज कराने के लिए सेक्टर-19 थाना पहुँचा, तो उसे तुरंत मदद देने या नाकाबंदी करने के बजाय पुलिसकर्मियों ने यह कहकर वापस भेज दिया कि वह “कल सुबह आए”।
बड़ा सवाल: यदि शहर के व्यस्त रिहायशी इलाकों में शाम के 5 बजे वाहन सुरक्षित नहीं हैं, तो रात के अंधेरे में नागरिक खुद को और अपनी संपत्ति को कैसे सुरक्षित महसूस करेंगे?
चोरों का हॉटस्पॉट बनता सेक्टर-19 थाना क्षेत्र?
स्थानीय निवासियों में इस घटना को लेकर गहरा रोष है। तीन दिनों के भीतर ई-रिक्शा चोरी की यह दूसरी वारदात है, जो यह दर्शाती है कि चोरों के मन में पुलिस का कोई खौफ नहीं रह गया है। जहाँ प्रशासन नए साल की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, वहीं ज़मीनी हकीकत यह है कि चोर पुलिस की नाक के नीचे से वाहन उड़ा रहे हैं।
संपादकीय दृष्टिकोण: चंडीगढ़ जैसे आधुनिक शहर में सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछा होने के बावजूद दिन-दहाड़े चोरी होना सुरक्षा तंत्र की विफलता है। विशेष रूप से पुलिस का पीड़ित को सुबह आने के लिए कहना, जाँच में देरी और सबूत मिटने का कारण बन सकता है। अब देखना यह होगा कि सेक्टर-19 पुलिस इन चोरों को पकड़ने के लिए क्या रणनीति अपनाती है।
